न जाने क्या बात हो गयी,
न आयी है उनकी खबर,
ऐसा तो नहीं होता था,
क्या हो गये हैं बेखबर...?
ये तो कोई बात नहीं,
की दिल में उनके जज़्बात नहीं,
अभी तो बस शुरुआत है,
क्या ये भी उन्हें याद नहीं...?
वैसे तो कहते हैं हमसे,
की याद आती है तुम्हारी,
झूठे हैं वो कि उनको,
न क़द्र है हमारी |
कम से कम अब तक,
एक ख़त तो आ गया होता,
कैसे हैं वो किस हाल में है...?
ये तो बता दिया होता |
इतने निर्दयी न बनो,
ये दूरियां तो गिनो,
जीने का सहारा हमारे,
कागज़ का टुकड़ा है सुनो |
एक इस टुकड़े को भी,
क्यों छीने जाते हो...?
छोड़ भी दो ये जिद,
और लिखो की कब आते हो |
रोहिणी संकलन से एक रचना...............ये रचना रोहिणी की निजी संपत्ति है, प्रकाशित करने से पहले कृपया संपर्क करें || rohinisnegi@gmail.com/rohininegi@yahoo.com
आजीविका की होड़ में कभी-कभी हम लोग इतने व्यस्त हो जाते हैं कि अपने विचारों और अपनी भावनाओं का भी परित्याग करना पड़ता है | परन्तु इस माध्यम से हम एक बार फिर से जिवंत हो सकते हैं........!! अपनी इच्छाओं और विचारों को इन पन्नों पर उजागर कर सकते हैं.......!! कल्पना के सागर में गोता लगाने के लिए.......!! और इस विशाल सागर की गहराई को नापने के लिए.......!! ये जिज्ञासा यूँ ही बनी रहेगी.......!! क्या आप मेरा साथ देंगे......??
Wednesday, June 29, 2011
मुसाफिर ख़ाना...!!! "रोहिणी संकलन" से...
ये जहाँ......एक मुसाफिर ख़ाना है,
जिसे देखो.......वही अनजाना है,
सूरतें मिलती- जुलती सी हैं सबकी,
पर हर कोई एक-दूसरे से बेगाना है |
ज़िन्दगी का बोझ सामान की तरह,
कांधों पर लिए चले जा रहे हैं,
बिना किसी की परवाह किये,
सबकी नज़र से बचे जा रहे हैं |
अपनी ही मस्ती में मगन हैं सारे,
क्यों कर फिक्र हो किसी की उन्हें..?
ऐसे चले जा रहे हैं के जैसे,
कोई कारवां मिल गया हो उन्हें |
मंजिल है एक सभी की.... हैं चलते,
फिर भी हैं कितने अनजान सबसे,
कोई नहीं है समझता यहाँ पर,
रस्ता है जाता सफ़र का इधर से |
सच तो सच है झुठला न पाएंगे,
ये ज़िन्दगी बस... यहीं छोड़ जायेंगे,
साथ किसी का मिले न मिले फिर भी,
हैं तो मुसाफिर......कहाँ भूल पाएंगे....?
रोहिणी संकलन से एक रचना...............ये रचना रोहिणी की निजी संपत्ति है, प्रकाशित करने से पहले कृपया संपर्क करें || rohinisnegi@gmail.com/rohininegi@yahoo.com
जिसे देखो.......वही अनजाना है,
सूरतें मिलती- जुलती सी हैं सबकी,
पर हर कोई एक-दूसरे से बेगाना है |
ज़िन्दगी का बोझ सामान की तरह,
कांधों पर लिए चले जा रहे हैं,
बिना किसी की परवाह किये,
सबकी नज़र से बचे जा रहे हैं |
अपनी ही मस्ती में मगन हैं सारे,
क्यों कर फिक्र हो किसी की उन्हें..?
ऐसे चले जा रहे हैं के जैसे,
कोई कारवां मिल गया हो उन्हें |
मंजिल है एक सभी की.... हैं चलते,
फिर भी हैं कितने अनजान सबसे,
कोई नहीं है समझता यहाँ पर,
रस्ता है जाता सफ़र का इधर से |
सच तो सच है झुठला न पाएंगे,
ये ज़िन्दगी बस... यहीं छोड़ जायेंगे,
साथ किसी का मिले न मिले फिर भी,
हैं तो मुसाफिर......कहाँ भूल पाएंगे....?
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बूँदें जिंदगी की...!!! " रोहिणी संकलन" से...
जिंदगी कितनी बेबस और लाचार सी लगती है,
मासूम चेहरों की ये मुस्कराहट,
सब बेकार सी लगती है,
जब लहू की कुछ बूंदों के लिए,
उनकी निगाहें तरसती हैं |
खोजती रहती हैं इस भीड़ में,
बस वो चेहरे जो ख़ुशी दे जाए,
इंसानियत की खातिर ही सही,
गर सब साहस जुटाएं,
कुछ और साँसे शायद हम,
तब उन्हें दे पायें |
जब रगों में लहू, लहर बनकर,
नस-नस भिगोती है,
जीवन की चंद साँसे ख़ुशी-ख़ुशी,
कुछ और आगे बढती हैं |
वो उनके दिल में उम्मीद जगाती है,
हर पल उनको यही विश्वास दिलाती है,
कोई है जो उनके साथ खड़ा है,
जिसके होने से उनका हौसला बढ़ा है |
क्यों ये लहू बेवजह बहता रहे,
क्यों ये मासूम चेहरे पीड़ा सहे,
क्यों न ये लहू,
ज़रुरत मंद की रगों में बहे ?
उनकी मुस्कराहट और खिल-खिलाहट का,
बस यही तो एक राज़ है,
ये साँसें जिंदगी की हैं....उनके लिए,
जो कुछ बूंदों की मोहताज है |
तो चलो, आओ, आगे बढ़ें,
आज हम ये प्रण करें,
रक्त-दान महा-दान है,
सब मिलकर रक्त-दान करें |
रोहिणी संकलन से एक रचना...............ये रचना रोहिणी की निजी संपत्ति है, प्रकाशित करने से पहले कृपया संपर्क करें || rohinisnegi@gmail.com/rohininegi@yahoo.com
मासूम चेहरों की ये मुस्कराहट,
सब बेकार सी लगती है,
जब लहू की कुछ बूंदों के लिए,
उनकी निगाहें तरसती हैं |
खोजती रहती हैं इस भीड़ में,
बस वो चेहरे जो ख़ुशी दे जाए,
इंसानियत की खातिर ही सही,
गर सब साहस जुटाएं,
कुछ और साँसे शायद हम,
तब उन्हें दे पायें |
जब रगों में लहू, लहर बनकर,
नस-नस भिगोती है,
जीवन की चंद साँसे ख़ुशी-ख़ुशी,
कुछ और आगे बढती हैं |
वो उनके दिल में उम्मीद जगाती है,
हर पल उनको यही विश्वास दिलाती है,
कोई है जो उनके साथ खड़ा है,
जिसके होने से उनका हौसला बढ़ा है |
क्यों ये लहू बेवजह बहता रहे,
क्यों ये मासूम चेहरे पीड़ा सहे,
क्यों न ये लहू,
ज़रुरत मंद की रगों में बहे ?
उनकी मुस्कराहट और खिल-खिलाहट का,
बस यही तो एक राज़ है,
ये साँसें जिंदगी की हैं....उनके लिए,
जो कुछ बूंदों की मोहताज है |
तो चलो, आओ, आगे बढ़ें,
आज हम ये प्रण करें,
रक्त-दान महा-दान है,
सब मिलकर रक्त-दान करें |
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Monday, June 13, 2011
पैमाना...!!! रोहिणी संकलन से...
जुबान पे कुछ दिल पे कुछ,
ये अदा कुछ अजब सी लगती है,
ज़ालिम तेरे प्यार में,
हर अदा गज़ब सी लगती है |
पैमाना तेरी आँखों का,
छलक जाए तो क्या हो...??
होश जो खो बैठें कहीं,
अंजाम न जाने क्या हो...?
होंठों से लगा ले मुझे साकी,
बना के जाम पीले,
ये रात यूँही कट जायेगी,
जो तू मेरा नाम भी लेले |
अरमान मचल जाएँ उनके ख्याल से,
तबियत कुछ नासाज़ सी लगती है,
क्या करें.....तेरे इश्क में ज़ालिम,
ये दुनिया बद -हवास सी लगती है |
रोहिणी संकलन से एक रचना...............ये रचना रोहिणी की निजी संपत्ति है, प्रकाशित करने से पहले कृपया संपर्क कर अनुमति लें|| rohinisnegi@gmail.com/rohininegi@yahoo.com.
ये अदा कुछ अजब सी लगती है,
ज़ालिम तेरे प्यार में,
हर अदा गज़ब सी लगती है |
पैमाना तेरी आँखों का,
छलक जाए तो क्या हो...??
होश जो खो बैठें कहीं,
अंजाम न जाने क्या हो...?
होंठों से लगा ले मुझे साकी,
बना के जाम पीले,
ये रात यूँही कट जायेगी,
जो तू मेरा नाम भी लेले |
अरमान मचल जाएँ उनके ख्याल से,
तबियत कुछ नासाज़ सी लगती है,
क्या करें.....तेरे इश्क में ज़ालिम,
ये दुनिया बद -हवास सी लगती है |
रोहिणी संकलन से एक रचना...............ये रचना रोहिणी की निजी संपत्ति है, प्रकाशित करने से पहले कृपया संपर्क कर अनुमति लें|| rohinisnegi@gmail.com/rohininegi@yahoo.com.
सज़ा...!!! "रोहिणी संकलन" से...
अपनी इच्छाओं को कर दफ़न,
कैसे कोई जी सकता है............??
ये सेहन शक्ति है या,
किसी तरह कि सज़ा.................??
बेड़ियों में जकड़ी उन रातों को,
कैसे कोई भूल सकता है...........??
ये नाराज़गी है या,
किसी तरह कि सज़ा................??
चादर से लिपटकर हर- दम,
कैसे कोई रो सकता है............??
ये उनकी जुदाई है या,
किसी तरह कि सज़ा................??
हज़ारो ख्वाहिशें हैं दिल में,
कैसे कोई छोड़ सकता है.........??
पूरा न होने का डर है या.......??
किसी तरह कि सज़ा...............??
हम तड़पें इस ख्याल से,
कैसे कोई खुद को तड़पा सकता है....??
ये उनकी जिद है या,
किसी तरह कि सज़ा...............??
रोहिणी संकलन से एक रचना...............ये रचना रोहिणी की निजी संपत्ति है, प्रकाशित करने से पहले कृपया संपर्क कर अनुमति लें|| rohinisnegi@gmail.com/rohininegi@yahoo.com.
कैसे कोई जी सकता है............??
ये सेहन शक्ति है या,
किसी तरह कि सज़ा.................??
बेड़ियों में जकड़ी उन रातों को,
कैसे कोई भूल सकता है...........??
ये नाराज़गी है या,
किसी तरह कि सज़ा................??
चादर से लिपटकर हर- दम,
कैसे कोई रो सकता है............??
ये उनकी जुदाई है या,
किसी तरह कि सज़ा................??
हज़ारो ख्वाहिशें हैं दिल में,
कैसे कोई छोड़ सकता है.........??
पूरा न होने का डर है या.......??
किसी तरह कि सज़ा...............??
हम तड़पें इस ख्याल से,
कैसे कोई खुद को तड़पा सकता है....??
ये उनकी जिद है या,
किसी तरह कि सज़ा...............??
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कुछ अध्-बुने ख्यालl...!!! "रोहिणी संकलन" से...
by Rohini Negi on Sunday, May 29, 2011 at 3:15pm
कुछ अध्-बुने ख्याल,
मन को झिंझोड़ते हैं,
जैसे शांत नदी में उफनती,
तेज लहर की उथल-पुथल |
जो.......कुछ पल के लिए,
उसके ठहराव को,
उग्ग्रता में बदल देती है,
उसका चैन छीन लेती है |
सोचती है ऐसा करने से,
उसकी प्रकृति बदल देगी,
बहने का अंदाज़ बदल देगी,
मूर्ख है इतना नहीं समझती |
उसकी उग्ग्रता पल दो पल है,
नदी का शांत बहाव,
कब लहर की उग्ग्रता समेत ले,
शायद पता भी न चले.....?
क्या.......उसका उफान, उसका तेज,
उसकी अधीरता, उसका वेग,
सरल, सरस और निश्छल नदी को,
अपने रंग में ढाल पायेगा.......??
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कुछ अध्-बुने ख्याल,
मन को झिंझोड़ते हैं,
जैसे शांत नदी में उफनती,
तेज लहर की उथल-पुथल |
जो.......कुछ पल के लिए,
उसके ठहराव को,
उग्ग्रता में बदल देती है,
उसका चैन छीन लेती है |
सोचती है ऐसा करने से,
उसकी प्रकृति बदल देगी,
बहने का अंदाज़ बदल देगी,
मूर्ख है इतना नहीं समझती |
उसकी उग्ग्रता पल दो पल है,
नदी का शांत बहाव,
कब लहर की उग्ग्रता समेत ले,
शायद पता भी न चले.....?
क्या.......उसका उफान, उसका तेज,
उसकी अधीरता, उसका वेग,
सरल, सरस और निश्छल नदी को,
अपने रंग में ढाल पायेगा.......??
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