Pages

Monday, June 13, 2011

सज़ा...!!! "रोहिणी संकलन" से...

अपनी इच्छाओं को कर दफ़न,
कैसे कोई जी सकता है............??
ये सेहन शक्ति है या,
किसी तरह कि सज़ा.................??

बेड़ियों में जकड़ी उन रातों को,
कैसे कोई भूल सकता है...........??
ये नाराज़गी है या,
किसी तरह कि सज़ा................??

चादर से लिपटकर हर- दम,
कैसे कोई रो सकता है............??
ये उनकी जुदाई है या,
किसी तरह कि सज़ा................??

हज़ारो ख्वाहिशें हैं दिल में,
कैसे कोई छोड़ सकता है.........??
पूरा न होने का डर है या.......??
किसी तरह कि सज़ा...............??

हम तड़पें इस ख्याल से,
कैसे कोई खुद को तड़पा सकता है....??
ये उनकी जिद है या,
किसी तरह कि सज़ा...............??

रोहिणी संकलन से एक रचना...............ये रचना रोहिणी की निजी संपत्ति है, प्रकाशित करने से पहले कृपया संपर्क कर अनुमति लें|| rohinisnegi@gmail.com/rohininegi@yahoo.com.

No comments:

Post a Comment