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Monday, March 7, 2011

दोस्त...!!! "रोहिणी संकलन" से...

दोस्त...!!! "रोहिणी संकलन" से...

आज एक दोस्त की कमी हमें खल रही है,
जिसकी याद पल-पल हमारे संग चल रही है |

हर वीकेंड पर उसका काम था महफ़िल सजाना,
महफ़िल सजा कर जबरदस्त रंग जमाना |

गाने का आगाज़ कर धूम मचाना,
बारी-बारी सब गायेंगे हमेशा ये फरमाना |

उसकी इस बात को कोई टाल भी नहीं पता था,
हर वक़्त अपनी मनमानी कर जाता था |

हम सब लाचार से कुछ न कह पाते थे,
हार-झक-मार कर शुरू हो जाते थे |

कोई पानी से गला साफ़ करता था,
तो कोई अपना कोने में मुंह छुपता था |

फिर भी बेचारा बच नहीं पाता था,
और गाने की सूली पर चढ़ जाता था |

हमने भी बड़े इंतज़ाम किये बच निकलने के,
पर कमबख्त हर वक़्त सामने आ जाता था |

पर अब क्या करेंगे...? इंतज़ार के सिवाय,
उम्मीद रहेगी कि ऊपर वाला जल्द- मिलाये |

सब याद आयेगा हमें वो तब तक,
वापस न आ जाएँ फिर से वो जब तक |


रोहिणी संकलन से एक रचना...............ये रचना रोहिणी की निजी संपत्ति है, प्रकाशित करने से पहले कृपया संपर्क कर अनुमति लें|| rohinisnegi@gmail.com/rohininegi@yahoo.com

हाँ या ना...!!! "रोहिणी संकलन" से...

हर बात पर हमसे पूछना,
हाँ या ना..........??
उनकी आदत सी बन गयी है,
दो लफ्ज़ कितने आसान से लगते हैं,
जिन पर उनकी ज़बान ही अटक गयी है ||

अपने इशारों से हमको हमेशा बनाते हैं,
सोचते हैं इशारा हम न समझ पाते हैं,
ये उनकी गलत-फहमी न जाने कब तक रहेगी,
क्यों हमें ही वो अक्सर इलज़ाम दिए जाते हैं ||

इशारों ही इशारों में करके इशारा,
पूछा उन्होंने क्या प्यार निभाएंगे,
हमने भी करके नज़ारा इशारों का,
उनसे कहा हम ये फिर बताएँगे ||

इस बे-तकल्लुफ जवाब ने मेरे,
उनकी परेशानियों को बढाया,
ऊपर से नीचे तक सारा बदन तब,
गुस्से में था तिलमिलाया ||

पर कुछ भी तो उनके बस में नहीं है,
चाहने से कुछ भी तो होता नहीं है ||


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वजूद...!!! " रोहिणी संकलन" से...

मेरा वजूद हिल जाता है जब.....
तुझसे बिछुड़ने का ख्याल आता है,
ज़ार-ज़ार रोती है आँखें तब....
कैसे जीऊँगी......?? ये सवाल आता है ll

मेरा वजूद हिल जाता है जब.....
ठण्ड से ठिठुरता बदन,
चंद साँसों का मोहताज होता है,
कांपते होंठ कुछ कहें,
और कहने की ख्वाहिश में दिल,
दम तोड़ जाता है ||

मेरा वजूद हिल जाता है जब.....
कोई अनजाना साया करीब आता है,
और रात का सन्नाटा धीरे से,
मेरे अकेलेपन को डस जाता है
लगता है जैसे चीखों में तब....
मेरी सांसों का दम सा घुटा जाता है ||

मेरा वजूद हिल जाता है जब.....
कोई अपना... दिल के करीब आता है,
और अपनी हल्की सी छुअन से,
दिल की धड़कने बढ़ा जाता है,
कुछ पल के लिए ही सही,
प्यार का एह्साह तो करा जाता है...
और मेरा वजूद संभल जाता है ||


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