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Monday, March 7, 2011

वजूद...!!! " रोहिणी संकलन" से...

मेरा वजूद हिल जाता है जब.....
तुझसे बिछुड़ने का ख्याल आता है,
ज़ार-ज़ार रोती है आँखें तब....
कैसे जीऊँगी......?? ये सवाल आता है ll

मेरा वजूद हिल जाता है जब.....
ठण्ड से ठिठुरता बदन,
चंद साँसों का मोहताज होता है,
कांपते होंठ कुछ कहें,
और कहने की ख्वाहिश में दिल,
दम तोड़ जाता है ||

मेरा वजूद हिल जाता है जब.....
कोई अनजाना साया करीब आता है,
और रात का सन्नाटा धीरे से,
मेरे अकेलेपन को डस जाता है
लगता है जैसे चीखों में तब....
मेरी सांसों का दम सा घुटा जाता है ||

मेरा वजूद हिल जाता है जब.....
कोई अपना... दिल के करीब आता है,
और अपनी हल्की सी छुअन से,
दिल की धड़कने बढ़ा जाता है,
कुछ पल के लिए ही सही,
प्यार का एह्साह तो करा जाता है...
और मेरा वजूद संभल जाता है ||


रोहिणी संकलन से एक रचना...............ये रचना रोहिणी की निजी संपत्ति है, प्रकाशित करने से पहले कृपया संपर्क कर अनुमति लें|| rohinisnegi@gmail.com/rohininegi@yahoo.com

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