हर बात पर हमसे पूछना,
हाँ या ना..........??
उनकी आदत सी बन गयी है,
दो लफ्ज़ कितने आसान से लगते हैं,
जिन पर उनकी ज़बान ही अटक गयी है ||
अपने इशारों से हमको हमेशा बनाते हैं,
सोचते हैं इशारा हम न समझ पाते हैं,
ये उनकी गलत-फहमी न जाने कब तक रहेगी,
क्यों हमें ही वो अक्सर इलज़ाम दिए जाते हैं ||
इशारों ही इशारों में करके इशारा,
पूछा उन्होंने क्या प्यार निभाएंगे,
हमने भी करके नज़ारा इशारों का,
उनसे कहा हम ये फिर बताएँगे ||
इस बे-तकल्लुफ जवाब ने मेरे,
उनकी परेशानियों को बढाया,
ऊपर से नीचे तक सारा बदन तब,
गुस्से में था तिलमिलाया ||
पर कुछ भी तो उनके बस में नहीं है,
चाहने से कुछ भी तो होता नहीं है ||
रोहिणी संकलन से एक रचना...............ये रचना रोहिणी की निजी संपत्ति है, प्रकाशित करने से पहले कृपया संपर्क कर अनुमति लें|| rohinisnegi@gmail.com/rohininegi@yahoo.com
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