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Monday, March 7, 2011

हाँ या ना...!!! "रोहिणी संकलन" से...

हर बात पर हमसे पूछना,
हाँ या ना..........??
उनकी आदत सी बन गयी है,
दो लफ्ज़ कितने आसान से लगते हैं,
जिन पर उनकी ज़बान ही अटक गयी है ||

अपने इशारों से हमको हमेशा बनाते हैं,
सोचते हैं इशारा हम न समझ पाते हैं,
ये उनकी गलत-फहमी न जाने कब तक रहेगी,
क्यों हमें ही वो अक्सर इलज़ाम दिए जाते हैं ||

इशारों ही इशारों में करके इशारा,
पूछा उन्होंने क्या प्यार निभाएंगे,
हमने भी करके नज़ारा इशारों का,
उनसे कहा हम ये फिर बताएँगे ||

इस बे-तकल्लुफ जवाब ने मेरे,
उनकी परेशानियों को बढाया,
ऊपर से नीचे तक सारा बदन तब,
गुस्से में था तिलमिलाया ||

पर कुछ भी तो उनके बस में नहीं है,
चाहने से कुछ भी तो होता नहीं है ||


रोहिणी संकलन से एक रचना...............ये रचना रोहिणी की निजी संपत्ति है, प्रकाशित करने से पहले कृपया संपर्क कर अनुमति लें|| rohinisnegi@gmail.com/rohininegi@yahoo.com


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