दोस्त...!!! "रोहिणी संकलन" से...
आज एक दोस्त की कमी हमें खल रही है,
जिसकी याद पल-पल हमारे संग चल रही है |
हर वीकेंड पर उसका काम था महफ़िल सजाना,
महफ़िल सजा कर जबरदस्त रंग जमाना |
गाने का आगाज़ कर धूम मचाना,
बारी-बारी सब गायेंगे हमेशा ये फरमाना |
उसकी इस बात को कोई टाल भी नहीं पता था,
हर वक़्त अपनी मनमानी कर जाता था |
हम सब लाचार से कुछ न कह पाते थे,
हार-झक-मार कर शुरू हो जाते थे |
कोई पानी से गला साफ़ करता था,
तो कोई अपना कोने में मुंह छुपता था |
फिर भी बेचारा बच नहीं पाता था,
और गाने की सूली पर चढ़ जाता था |
हमने भी बड़े इंतज़ाम किये बच निकलने के,
पर कमबख्त हर वक़्त सामने आ जाता था |
पर अब क्या करेंगे...? इंतज़ार के सिवाय,
उम्मीद रहेगी कि ऊपर वाला जल्द- मिलाये |
सब याद आयेगा हमें वो तब तक,
वापस न आ जाएँ फिर से वो जब तक |
रोहिणी संकलन से एक रचना...............ये रचना रोहिणी की निजी संपत्ति है, प्रकाशित करने से पहले कृपया संपर्क कर अनुमति लें|| rohinisnegi@gmail.com/rohininegi@yahoo.com
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