जाने-मन, जाने-जिगर,
जाने तमन्ना तू ही तू,
तू नहीं तो कुछ नहीं,
जिंदगी बस तू ही तू
खाक में मिल जाऊं मैं ग़र,
साथ में जो तू नहीं,
और फलक पर छाऊँ मैं,
जो साथ भी तू दे कभी
इन्तहां की हद अगर पूछे,
कोई तो तू ही तू,
कुछ शुरू करना हो ग़र तो,
मेरी खातिर तू ही तू
फासले जो दरमियाँ हैं,
इनका कारण तू ही तू,
वास्ता हो क्यों किसी से,
मुझको भाए तू ही तू
बस तेरी यादें खज़ाना,
हर ख्याल तू ही तू,
है जवाब तुझसे जो,
उसका सवाल भी है तू
"रोहिणी संकलन" से एक रचना...............ये रचना रोहिणी की निजी संपत्ति है, प्रकाशित करने से पहले कृपया संपर्क करें rohinisnegi@gmail.com/rohininegi@yahoo.com
आजीविका की होड़ में कभी-कभी हम लोग इतने व्यस्त हो जाते हैं कि अपने विचारों और अपनी भावनाओं का भी परित्याग करना पड़ता है | परन्तु इस माध्यम से हम एक बार फिर से जिवंत हो सकते हैं........!! अपनी इच्छाओं और विचारों को इन पन्नों पर उजागर कर सकते हैं.......!! कल्पना के सागर में गोता लगाने के लिए.......!! और इस विशाल सागर की गहराई को नापने के लिए.......!! ये जिज्ञासा यूँ ही बनी रहेगी.......!! क्या आप मेरा साथ देंगे......??
Friday, March 9, 2012
Thursday, March 8, 2012
जिंदगी का इंतज़ार..!!! "रोहिणी संकलन" से...
created on on friday 15/10/10 at 2:30PM
दिल को मेरे अब जिंदगी का इंतज़ार है,
मैं क्या बताऊँ जिंदगी से मुझे प्यार है,
तुम हो मेरी वो जिंदगी,
तुमसे ही तो मेरा ये संसार है
दिल को मेरे अब............
मैं देखती हूँ तेरे आने की उस रह को,
जिस पर चले तुम लेके अपनी चाह को,
तुम खुश रहो मिल जाए तुमको,
जिसका तुम्हे भी इंतज़ार है
दिल को मेरे अब............
मैं कुछ न जानू बस में नहीं है कुछ मेरे,
सोचती कुछ हूँ होता है कुछ दिल से मेरे,
लगता है दर कहीं चली जाए न,
जिंदगी से ये जो बहार है
दिल को मेरे अब............
सोचकर तुम ही बताओ कुछ की मैं क्या करूँ,
मैं तो हमेसः तुम्हारे ख्यालों में ही रहूँ,
देखो कहीं कुछ खो जाए न,
इसलिए दिल बेकरार है
दिल को मेरे अब.............
"रोहिणी संकलन" से एक रचना...............ये रचना रोहिणी की निजी संपत्ति है, प्रकाशित करने से पहले कृपया संपर्क करें rohinisnegi@gmail.com/rohininegi@yahoo.com
दिल को मेरे अब जिंदगी का इंतज़ार है,
मैं क्या बताऊँ जिंदगी से मुझे प्यार है,
तुम हो मेरी वो जिंदगी,
तुमसे ही तो मेरा ये संसार है
दिल को मेरे अब............
मैं देखती हूँ तेरे आने की उस रह को,
जिस पर चले तुम लेके अपनी चाह को,
तुम खुश रहो मिल जाए तुमको,
जिसका तुम्हे भी इंतज़ार है
दिल को मेरे अब............
मैं कुछ न जानू बस में नहीं है कुछ मेरे,
सोचती कुछ हूँ होता है कुछ दिल से मेरे,
लगता है दर कहीं चली जाए न,
जिंदगी से ये जो बहार है
दिल को मेरे अब............
सोचकर तुम ही बताओ कुछ की मैं क्या करूँ,
मैं तो हमेसः तुम्हारे ख्यालों में ही रहूँ,
देखो कहीं कुछ खो जाए न,
इसलिए दिल बेकरार है
दिल को मेरे अब.............
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