जाने-मन, जाने-जिगर,
जाने तमन्ना तू ही तू,
तू नहीं तो कुछ नहीं,
जिंदगी बस तू ही तू
खाक में मिल जाऊं मैं ग़र,
साथ में जो तू नहीं,
और फलक पर छाऊँ मैं,
जो साथ भी तू दे कभी
इन्तहां की हद अगर पूछे,
कोई तो तू ही तू,
कुछ शुरू करना हो ग़र तो,
मेरी खातिर तू ही तू
फासले जो दरमियाँ हैं,
इनका कारण तू ही तू,
वास्ता हो क्यों किसी से,
मुझको भाए तू ही तू
बस तेरी यादें खज़ाना,
हर ख्याल तू ही तू,
है जवाब तुझसे जो,
उसका सवाल भी है तू
"रोहिणी संकलन" से एक रचना...............ये रचना रोहिणी की निजी संपत्ति है, प्रकाशित करने से पहले कृपया संपर्क करें rohinisnegi@gmail.com/rohininegi@yahoo.com
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