गर्व है मुझे उनपर,
जिनकी बदौलत मैं ज़िंदा हूँ,
जो मर-मिटे मुझपर,
उनके लिए स्वच्छंद परिंदा हूँ,
यूँ ही अपने सीने से,
लगाए रखना दोस्तों,
क्योंकि.....................!!
तुम्हारी आन, बान, और शान का प्रतीक,
मैं ही वो तिरंगा हूँ.........!!
कितने ही रक्त-रंजित शीश,
मुझमें सिमटे और कुछ कह गए,
शहीद -ए-कफ़न बना,
मुझसे लिपटे और बरस गए।
उन्ही के कर्मों से आज,
मैं ज़िंदा हूँ,
क्योंकि.....................!!
तुम्हारी आन, बान, और शान का प्रतीक,
मैं ही वो तिरंगा हूँ.........!!
रोहिणी संकलन से एक रचना...............ये रचना रोहिणी की निजी संपत्ति है ।प्रकाशित करने से पहले कृपया संपर्क कर अनुमति लें|| rohinisnegi@gmail.com/rohininegi@yahoo