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Friday, April 25, 2025

गर्व है मुझे …!!

 गर्व है मुझे उनपर,

जिनकी बदौलत मैं ज़िंदा हूँ,

जो मर-मिटे मुझपर, 

उनके लिए स्वच्छंद परिंदा हूँ, 


यूँ ही अपने सीने से, 

लगाए रखना दोस्तों,

क्योंकि.....................!!

तुम्हारी आन, बान, और शान का प्रतीक, 

मैं ही वो तिरंगा हूँ.........!! 


कितने ही रक्त-रंजित शीश, 

मुझमें सिमटे और कुछ कह गए, 

शहीद -ए-कफ़न बना,

मुझसे लिपटे और बरस गए।


उन्ही के कर्मों से आज, 

मैं ज़िंदा हूँ, 

क्योंकि.....................!!

तुम्हारी आन, बान, और शान का प्रतीक, 

मैं ही वो तिरंगा हूँ.........!!


रोहिणी संकलन से एक रचना...............ये रचना रोहिणी की निजी संपत्ति है ।प्रकाशित करने से पहले कृपया संपर्क कर अनुमति लें|| rohinisnegi@gmail.com/rohininegi@yahoo


क्या मैंने कुछ ग़लत किया…?

 क्या मैंने कुछ ग़लत किया..?

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दुश्मन बैठा किसी कोने में ख़ुद,

ग़ैरों को पट्टी पढ़ा रहा,

इंसानियत का चूरन बेचकर,

हथियारों से लड़ा रहा…!


उसमें इस बात का रोष है, 

कि मैं उस से अलग हूँ,

मुझे इस बात की पीड़ा,

कि वो समझता है मैं ग़लत हूँ…!


ये ना-समझी समझूँ,

या बग़ावत है उसकी, 

अरे…बरगलाया जिसने,

चाकरी कर रहा है उसकी…!


सरल-सुगम रास्ता छोड़,

ये क्या राह पकड़ी है…?

क्यों ये ज़िंदगी अपनी,

बेड़ियों में जकड़ी है…?


कितने ग़र्त में डूबा है वो, 

क्यों इतना जलता है…?

उसकी इस बद-ज़ुबानी से,

नज़रिए का पता चलता है…!


क्या क़ुसूर था मेरा,

जो नाम जानकर वार किया,

मेरे साथ-साथ उसने अपने, 

ईमान को तार-तार किया…!


 ये जानकर कि मैं कौन हूँ,

उसने सीना छलनी किया,

पहचान बता कर अपनी, 

क्या मैंने कुछ ग़लत किया..?


रोहिणी संकलन से एक रचना...............ये रचना रोहिणी की निजी संपत्ति है ।प्रकाशित करने से पहले कृपया संपर्क कर अनुमति लें|| rohinisnegi@gmail.com/rohininegi@yahoo