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Tuesday, September 10, 2019

"भारतवर्ष का स्वरूप".....!!

चोटी का सिर-दर्द बना था जो
वो दर्द मिटाया है
आज शहीदों के बलिदान का
क़र्ज़ उन्हें चुकाया है,
मस्तक जो सूना था अब तक
उस पर तिलक लगाया है,
मेरे भारत-वर्ष के माथे का
स्वरूप लौट आया है।

दो विधान और दो निशान की
गाथा बहुत सुनाते थे
"भिन्न हैं हम" कहकर स्वयम् को
जो ये भ्रम फैलाते थे,
आशंकाओं के घेरे में
जो फ़साद करवाते थे,
आज सुना है वक़्त ने........
उनको भी रुलाया है
मेरे भारत-वर्ष के माथे का
स्वरूप लौट आया है।

है सम्पूर्ण अधिकार सभी का
वो सम्मान मिलेगा सब,
खण्ड-खण्ड में जो बिखरा था
आज अखण्ड हुआ है अब,
काली स्याह रात की परछाईं का
अंत किया है अब,
एक राष्ट्र हैं हम.....जनहित में
जारी ये करवाया है,
मेरे भारत-वर्ष के माथे का
स्वरूप लौट आया है...!
मेरे भारत-वर्ष के माथे का

स्वरूप लौट आया है...!!

रोहिणी संकलन से एक रचना...............ये रचना रोहिणी की निजी संपत्ति है ।प्रकाशित करने से पहले कृपया संपर्क कर अनुमति लें|| rohinisnegi@gmail.com/rohininegi@yahoo