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Monday, June 13, 2011

पैमाना...!!! रोहिणी संकलन से...

जुबान पे कुछ दिल पे कुछ,
ये अदा कुछ अजब सी लगती है,
ज़ालिम तेरे प्यार में,
हर अदा गज़ब सी लगती है |

पैमाना तेरी आँखों का,
छलक जाए तो क्या हो...??
होश जो खो बैठें कहीं,
अंजाम न जाने क्या हो...?

होंठों से लगा ले मुझे साकी,
बना के जाम पीले,
ये रात यूँही कट जायेगी,
जो तू मेरा नाम भी लेले |

अरमान मचल जाएँ उनके ख्याल से,
तबियत कुछ नासाज़ सी लगती है,
क्या करें.....तेरे इश्क में ज़ालिम,
ये दुनिया बद -हवास सी लगती है |

रोहिणी संकलन से एक रचना...............ये रचना रोहिणी की निजी संपत्ति है, प्रकाशित करने से पहले कृपया संपर्क कर अनुमति लें|| rohinisnegi@gmail.com/rohininegi@yahoo.com.

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