जिंदगी कितनी बेबस और लाचार सी लगती है,
मासूम चेहरों की ये मुस्कराहट,
सब बेकार सी लगती है,
जब लहू की कुछ बूंदों के लिए,
उनकी निगाहें तरसती हैं |
खोजती रहती हैं इस भीड़ में,
बस वो चेहरे जो ख़ुशी दे जाए,
इंसानियत की खातिर ही सही,
गर सब साहस जुटाएं,
कुछ और साँसे शायद हम,
तब उन्हें दे पायें |
जब रगों में लहू, लहर बनकर,
नस-नस भिगोती है,
जीवन की चंद साँसे ख़ुशी-ख़ुशी,
कुछ और आगे बढती हैं |
वो उनके दिल में उम्मीद जगाती है,
हर पल उनको यही विश्वास दिलाती है,
कोई है जो उनके साथ खड़ा है,
जिसके होने से उनका हौसला बढ़ा है |
क्यों ये लहू बेवजह बहता रहे,
क्यों ये मासूम चेहरे पीड़ा सहे,
क्यों न ये लहू,
ज़रुरत मंद की रगों में बहे ?
उनकी मुस्कराहट और खिल-खिलाहट का,
बस यही तो एक राज़ है,
ये साँसें जिंदगी की हैं....उनके लिए,
जो कुछ बूंदों की मोहताज है |
तो चलो, आओ, आगे बढ़ें,
आज हम ये प्रण करें,
रक्त-दान महा-दान है,
सब मिलकर रक्त-दान करें |
रोहिणी संकलन से एक रचना...............ये रचना रोहिणी की निजी संपत्ति है, प्रकाशित करने से पहले कृपया संपर्क करें || rohinisnegi@gmail.com/rohininegi@yahoo.com
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