न जाने क्या बात हो गयी,
न आयी है उनकी खबर,
ऐसा तो नहीं होता था,
क्या हो गये हैं बेखबर...?
ये तो कोई बात नहीं,
की दिल में उनके जज़्बात नहीं,
अभी तो बस शुरुआत है,
क्या ये भी उन्हें याद नहीं...?
वैसे तो कहते हैं हमसे,
की याद आती है तुम्हारी,
झूठे हैं वो कि उनको,
न क़द्र है हमारी |
कम से कम अब तक,
एक ख़त तो आ गया होता,
कैसे हैं वो किस हाल में है...?
ये तो बता दिया होता |
इतने निर्दयी न बनो,
ये दूरियां तो गिनो,
जीने का सहारा हमारे,
कागज़ का टुकड़ा है सुनो |
एक इस टुकड़े को भी,
क्यों छीने जाते हो...?
छोड़ भी दो ये जिद,
और लिखो की कब आते हो |
रोहिणी संकलन से एक रचना...............ये रचना रोहिणी की निजी संपत्ति है, प्रकाशित करने से पहले कृपया संपर्क करें || rohinisnegi@gmail.com/rohininegi@yahoo.com
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