तू...........मेरी आँखों का नूर है,
ख़्वाब है....इस दिल का सुरूर है,
ग़र.............मुझसे रूठा हुज़ूर है,
तो बता......मेरा क्या कुसूर है....?
नज़र-ए-इनायत कम है आजकल,
हमें तो अब शक हो चला है,
कहीं ऐसा तो नहीं हमदम,
हम से बेज़ार हो चला है,
कहीं उसे....................!!!
कोई और तो नहीं मिला है....??
पैगाम-ए-मुहोब्बत भेजा था,
कोई जवाब न आया उधर से,
चुभन सी दे गयी ये बात,
सीने में घर कर गयी कसम से |
कितना तीखा है ये ज़ख्म,
जो उसने दिया है हमें,
पहली बार हुआ था शायद,
तभी तो अलेहदा किया है हमें |
रोहिणी संकलन से एक रचना...............ये रचना रोहिणी की निजी संपत्ति है, प्रकाशित करने से पहले कृपया संपर्क करें || rohinisnegi@gmail.com/rohininegi@yahoo.com
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