Pages

Sunday, July 10, 2011

दिलों के रिश्ते ...!!! "रोहिणी संकलन" से...

आँखों और दिलों के रिश्ते ही तो समझ में आते हैं,
दिमाग से किये गए फैसले अक्सर धोखा खाते हैं,
इन्सान कितना भी स्वार्थी क्यों न हो मगर ए-दोस्त,
ये रिश्ते ही आगे चलकर साथ निभाते हैं........|

ये अच्छा-बुरा, नफ़ा-नुक्सान नहीं जानता,
ऊँच-नीच, और जात-पात नहीं मानता,
लोगों में भेद-भाव करना इसके बस की बात नहीं,
आगे इसका क्या हो अंजाम ये नहीं जानता..... |

दिलों से रिश्ते जोड़े जाते हैं व्यापार नहीं,
जहाँ सौदेबाजी का खेल है वहां प्यार नहीं,
नफ़रत के बीज बोने से क्या फायदा ए-दोस्त,
पर ये दिमाग कब समझेगा उसे कोई सरोकार नहीं |

यही विडंबना है इस जीवन की,
दिलों की बात कौन समझता है,
जिसे देखो अपने मतलब के लिए,
हर कोई दिमाग़ से ही चलता है |

रोहिणी संकलन से एक रचना...............ये रचना रोहिणी की निजी संपत्ति है, प्रकाशित करने से पहले कृपया संपर्क करें || rohinisnegi@gmail.com/rohininegi@yahoo.com

No comments:

Post a Comment