आँखों और दिलों के रिश्ते ही तो समझ में आते हैं,
दिमाग से किये गए फैसले अक्सर धोखा खाते हैं,
इन्सान कितना भी स्वार्थी क्यों न हो मगर ए-दोस्त,
ये रिश्ते ही आगे चलकर साथ निभाते हैं........|
ये अच्छा-बुरा, नफ़ा-नुक्सान नहीं जानता,
ऊँच-नीच, और जात-पात नहीं मानता,
लोगों में भेद-भाव करना इसके बस की बात नहीं,
आगे इसका क्या हो अंजाम ये नहीं जानता..... |
दिलों से रिश्ते जोड़े जाते हैं व्यापार नहीं,
जहाँ सौदेबाजी का खेल है वहां प्यार नहीं,
नफ़रत के बीज बोने से क्या फायदा ए-दोस्त,
पर ये दिमाग कब समझेगा उसे कोई सरोकार नहीं |
यही विडंबना है इस जीवन की,
दिलों की बात कौन समझता है,
जिसे देखो अपने मतलब के लिए,
हर कोई दिमाग़ से ही चलता है |
रोहिणी संकलन से एक रचना...............ये रचना रोहिणी की निजी संपत्ति है, प्रकाशित करने से पहले कृपया संपर्क करें || rohinisnegi@gmail.com/rohininegi@yahoo.com
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