पकड़-पकड़,
कस के जकड़,
वरना भाग जाएगा।
बदमाश बड़ा है,
ज़मीन पर रगड़,
ख़ूब सताएगा ।
नुक़सान करता है,
सामान चुराता है,
जब देखो हमारी,
चीज़ें खा जाता है।
सिरदर्द बना है सबका,
जाने कहाँ से टपका ।
कौन इसे पकड़ेगा पहले,
शर्त यही लगाते हैं,
घर का कोना-कोना,
घरवाले छान मारते हैं।
ढूँढो उसको सारे मिलकर,
घर के किस कोने में छुपा है,
अरे बाबा- कोई और नहीं है,
वो एक मोटा "चूहा" है।😜
रोहिणी संकलन से एक रचना...............ये रचना रोहिणी की निजी संपत्ति है ।प्रकाशित करने से पहले कृपया संपर्क कर अनुमति लें|| rohinisnegi@gmail.com/rohininegi@yahoo
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