Pages

Wednesday, July 13, 2022

"नव-निर्माण"...!!! "रोहिणी संकलन" से...

 
शांत खड़ी मैं देख रही थी एक लोभी का लोभ, 
चीख-चीख कर सब को बुलाये देता था प्रलोभ |

उसकी शक्कर जैसी बातें रक्त-चाप को बढ़ाती,
कभी वो मुझको कभी मैं उसको कंखियों से बुलाती |

बातें बनावटी कर-कर के जाने क्या रस घोला,
जितने भी थे आस-पास उन सब का मन था डोला |

झूठी अफवाहों के पीछे "सच" बेचारा सिमट गया,
अपना कफन वो खुद पे लपेटे जा के ज़मीं से लिपट गया |

दफन हुआ गहरायी मे फिर कभी न ऊपर वो आया,
झूठ अब यारों राज कर रहा सच का तो साम्राज्य गया |

मेरी विनति है सब से क्यों हम ऐसों का साथ निभाएँ,
जो सच को पर्दे मे रखते और झूठों का मुकुट लगाए |

वापिस फिर से वही दौर हो दूर हो सारी अटकलें,
कपट, निराशा, झूठ नहीं हो हर कोई सच्ची राह चले |

आओ हम सब मिलकर प्रण लें ऐसा नव-निर्माण करें,
बस आदमी....आदमी न हो.......एक अच्छा इंसान बने | 


रोहिणी संकलन से एक रचना...............ये रचना रोहिणी की निजी संपत्ति है, प्रकाशित करने से पहले कृपया संपर्क कर अनुमति लें|| rohinisnegi@gmail.com/rohininegi@yahoo.com

No comments:

Post a Comment