किसी ने कहा...
हम अपने हैं ......तुम्हारे,
किसी ने कहा...
हम उनके हैं सहारे,
जांचा- परखा तो जाना,
कौन अपना है,
और कौन बेगाना,
भेड़ कि खाल में,
भेड़ियों को पहचाना,
चेहरा झूठ था सबका,
मुखौटों से छिपा हुआ,
नज़र आया शीशे में,
इस कदर था बिका हुआ,
क्यों हमने ज़िंदगी,
ऐसों के नाम की,
दोगला बनकर जिन्होंने,
हस्तियां बदनाम की,
अच्छा है शीशे ने,
परख तो करवाई,
कौन - कैसा है,
ये रौशनी तो दिखाई,
वरना हम तो आज भी,
झांसे में रहते,
बस उनके ढोंग को ही,
अपनापन समझते ||
रोहिणी संकलन से एक रचना...............ये रचना रोहिणी की निजी संपत्ति है, प्रकाशित करने से पहले कृपया संपर्क कर अनुमति लें|| rohinisnegi@gmail.com/rohininegi@yahoo.com
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