छोड़ के हाथ मेरा ऐसे मोड़ पर,
जा तो रहा है तू,
पर ये सोच कि तेरा भी कुछ,
छूट तो न जायेगा.......??
अश्कों के बादल, सीने की चुभन,
दिल के जख्मो पे,
कौन तेरे जाने के बाद ,
मरहम लगा पायेगा.....??
हल्की सी खलिश सीने की मेरे,
चैन तो न देगी मुझे,
वफ़ा की आड़ में बेवफाई का दर्द,
जाने कौन अब मिटा पाएगा ||
रोहिणी संकलन से एक रचना...............ये रचना रोहिणी की निजी संपत्ति है, प्रकाशित करने से पहले कृपया संपर्क कर अनुमति लें|| rohinisnegi@gmail.com/rohininegi@yahoo.com
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