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Monday, May 14, 2018

"बिछोह"...!!! "रोहिणी संकलन" से...


छोड़ के हाथ मेरा ऐसे मोड़ पर, 
जा तो रहा है तू,



पर ये सोच कि तेरा भी कुछ, 
छूट तो न जायेगा.......??


अश्कों के बादल, सीने की चुभन,
दिल के जख्मो पे,


कौन तेरे जाने के बाद ,
मरहम लगा पायेगा.....??


हल्की सी खलिश सीने की मेरे,
चैन तो न देगी मुझे,


वफ़ा की आड़ में बेवफाई का दर्द,
जाने कौन अब मिटा पाएगा ||



रोहिणी संकलन से एक रचना...............ये रचना रोहिणी की निजी संपत्ति है, प्रकाशित करने से पहले कृपया संपर्क कर अनुमति लें|| rohinisnegi@gmail.com/rohininegi@yahoo.com

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