ये सुहानी रात चाँदनी लिए साथ,
कितनी शांत और खुश-नसीब लगती है,
पर मेरी तनहाई मेरे जिस्म से लिपटी,
यादों की सौगात लिए बैठी है |
उसके शब्दों का,
मुरली की धुन की तरह,
मेरे कानों मे रस घोलना,
उस की आहट से मेरी साँसों का,
अपने दिल को टटोलना |
उसकी एक झलक पाने को आतुर,
मेरी नज़रों का बौखलाना,
पलकों की पंखुड़ियों से,
अनमोल मोतियों का बार-बार टपकना |
न जाने आज कहीं छूट-सा गया है,
हाय ! मेरा प्रियतम..........!!
मुझसे रूठ-सा गया है.......!!
रोहिणी संकलन से एक रचना...............ये रचना रोहिणी की निजी संपत्ति है, प्रकाशित करने से पहले कृपया संपर्क कर अनुमति लें|| rohinisnegi@gmail.com/rohininegi@yahoo.com
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