Thursday 8th April 2010 at 10:28am | Edit Draft | Discard
माँ तुम मेरे मन की गहराई में आ बस जाओ न,
प्रेरित करो मुझे तुम ऐसे मैं आगे बढ़ जाऊं माँ |
तुम कितनी करुणामयी हो ये मैं तुमको पहचान गया हूँ,
ज्ञान हमेशा सच्चा देती कर्मठता को जान गया हूँ |
नैतिकता के बोल सिखाती जीवन पर है किया उपकार,
कठिन रास्तों पर चलकर भी किया सदा मेरा उद्धार |
जब-जब उठा स्वप्न से रातों में अक्सर मैं घबराया,
तब-तब ममता का आँचल तुने मुझपर है लहराया |
कैसे भूल सकूँगा माँ मैं तेरा रात-रात भर जगना,
किसी तरह से नींद आ जाये मुझे तेरा बस यही सोचना |
तेरी कोख में पला बढ़ा मैं आलिंगनबद्ध रहता था,
अपने माथे पर चुम्बन पा मैं उत्साहित होता था |
वो माथे पर स्पर्श आज भी मुझे प्रेरणा देता है,
तेरा आशीर्वाद समझ दिल उसे ग्रहण कर लेता है |
जो सम्मान मेरी आँखों में तेरे लिए बसा है माँ,
उन आँखों में सदा समेटा मैंने तेरे लिए ही प्यार |
आदर्शों का पाठ पढाकर तुने ही सत्मार्ग दिखाया,
तू तो देवी है दात्री है तू है वृक्ष की कोमल छाया |
सीख सदा मुझे कर्मशील होने की तुमने दी है माँ,
तुम जननी हो जिसने जन्म दिया मुझको मैं धन्य हुआ |
रोहिणी संकलन से एक रचना...............ये रचना रोहिणी की निजी संपत्ति है, प्रकाशित करने से पहले कृपया संपर्क कर अनुमति लें|| rohinisnegi@gmail.com/rohininegi@yahoo.com
माँ तुम मेरे मन की गहराई में आ बस जाओ न,
प्रेरित करो मुझे तुम ऐसे मैं आगे बढ़ जाऊं माँ |
तुम कितनी करुणामयी हो ये मैं तुमको पहचान गया हूँ,
ज्ञान हमेशा सच्चा देती कर्मठता को जान गया हूँ |
नैतिकता के बोल सिखाती जीवन पर है किया उपकार,
कठिन रास्तों पर चलकर भी किया सदा मेरा उद्धार |
जब-जब उठा स्वप्न से रातों में अक्सर मैं घबराया,
तब-तब ममता का आँचल तुने मुझपर है लहराया |
कैसे भूल सकूँगा माँ मैं तेरा रात-रात भर जगना,
किसी तरह से नींद आ जाये मुझे तेरा बस यही सोचना |
तेरी कोख में पला बढ़ा मैं आलिंगनबद्ध रहता था,
अपने माथे पर चुम्बन पा मैं उत्साहित होता था |
वो माथे पर स्पर्श आज भी मुझे प्रेरणा देता है,
तेरा आशीर्वाद समझ दिल उसे ग्रहण कर लेता है |
जो सम्मान मेरी आँखों में तेरे लिए बसा है माँ,
उन आँखों में सदा समेटा मैंने तेरे लिए ही प्यार |
आदर्शों का पाठ पढाकर तुने ही सत्मार्ग दिखाया,
तू तो देवी है दात्री है तू है वृक्ष की कोमल छाया |
सीख सदा मुझे कर्मशील होने की तुमने दी है माँ,
तुम जननी हो जिसने जन्म दिया मुझको मैं धन्य हुआ |
रोहिणी संकलन से एक रचना...............ये रचना रोहिणी की निजी संपत्ति है, प्रकाशित करने से पहले कृपया संपर्क कर अनुमति लें|| rohinisnegi@gmail.com/rohininegi@yahoo.com
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