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Monday, April 28, 2014

समय की सीढ़ी...!!! "रोहिणी संकलन" से...


समय की सुइयों के,

बढ़ते अंतराल पर,
छलाँग लगाने का प्रक्रम,
अभी जारी है,
उम्मीदों में क़दमों को,
अागे बढ़ाने की बारी है,

मंज़िल मिले न मिले,
स्वयम् को एहसास दिलाना है,
प्रिष्ठ-भूमि ऐसी न थी हमारी,
किधर जा रहा ये ज़माना है ?

निरंतर कर्मठता जीवन में,
अग्रसरता लाती है,
सिर्फ़ एक सकारात्मक सोच ही,
मनुष्य को आइना दिखाती है,

तू चलता चल, 
अपनी राह बनाता चल,
कुरीतियों का नाश करके,
अग्रिम दिशा में बढ़ता चल,

मैं ये जानती हूँ............!!
छलाँग लगाना ही, 
किसी कर्म का उद्देश्य नहीं, 
फिर भी संभव है.........!!
पर.....समय के पहिये को, 
सीढ़ी बनाकर, 
दिशा-निर्देश देना,
बिल्कुल असम्भव है....!!


रोहिणी संकलन से एक रचना............ये रचना रोहिणी की निजी संपत्ति है, प्रकाशित करने से पहले कृपया संपर्क कर अनुमति ले|| rohinisnegi@gmail.com/rohininegi@yahoo.com

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