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Monday, April 28, 2014

होली का रंग....!!! "रोहिणी संकलन" से...

जन-मानस के मन-मस्तक पर,
चढ़ा ये कैसा रंग.............?


एकाकीपन लगता है कहीं,
हो न जाए भंग................!


इंद्र-धनुष के रंगों में सब,
सज गए घर-गलियारे,


छुप-छुप कर ओने-कोने से,
आने लगी फुहारें,


मस्तों की टोली रास्तों पर,
उमड़-घुमड़ कर दौडे़ं,


जो दिख गया उसी पर लपके,
कोई न किसी को छोडे़,


हल्के पर गहरे रंग ने है,
अपनी छाप को छोड़ा,


रह गए सारे दंग न निकले,
रगड़ के थोडा़-थोडा़........!

होली है.....................!!!!



रोहिणी संकलन से एक रचना............ये रचना रोहिणी की निजी संपत्ति है, प्रकाशित करने से पहले कृपया संपर्क कर अनुमति ले|| rohinisnegi@gmail.com/rohininegi@yahoo.com




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