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Sunday, April 27, 2014

"रिक्त हथेली"...!!! "रोहिणी संकलन" से...


ये स्पर्श बूंदों का, 
टिप-टिप कर, 
मेरे हाथों पर गिरना,
कभी तीव्र तो, 
कभी मद्धम-मद्धम, 
मेरी हथेलियों पर, 
टपकना |

मुट्ठी मे, 
बंद कर लेने को, 
अब तो जी चाहता है, 
हरदम,
आज नाचने को, 
जाने क्यों, 
फिर करता है, 
ये मेरा मन |

खिड़की पर, 
बैठे-बैठे मुझको, 
कितना इंतज़ार, 
कराती हैं ये,
देख नहीं सकता, 
इनको मैं, 
तभी शायद, 
रुलाती हैं ये |

देखूँ तो सही, 
इनमे ऐसा क्या है, 
छू कर तो, 
महसूस करूँ,
अन्यथा सर्र से, 
फिसल जाएंगी, 
जल्द ही, 
फिर रिक्त हथेली, 
सँवारता रहूँ |


रोहिणी संकलन से एक रचना............ये रचना रोहिणी की निजी संपत्ति है, प्रकाशित करने से पहले कृपया संपर्क कर अनुमति ले|| rohinisnegi@gmail.com/rohininegi@yahoo.com

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