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साहिल पे खड़े इंतज़ार किये बैठे थे,
तुम न आये,
प्यार कि मूरत बन इज़हार किये बैठे थे,
तुम न आये,
बेखुदी के आलम में निकलती रही आहें,
तुम न आये,
जिस्म फ़ना हो गया सुलगती रही बाहें,
तुम न आये,
बेजान जिन्दगी में बहार आ गयी होती पर,
तुम न आये,
तन्हाई की वो रातें साथ कट गयी होती पर,
तुम न आये,
ख्वाबों में तेरे आने के अरमान सजाये बैठे थे,
तुम न आये,
फिर भी यादों में तेरी दुनिया लुटाये बैठे थे,
तुम न आये |
रोहिणी संकलन से एक रचना............ये रचना रोहिणी की निजी संपत्ति है, प्रकाशित करने से पहले कृपया संपर्क कर अनुमति ले|| rohinisnegi@gmail.com/rohininegi@yahoo.com
साहिल पे खड़े इंतज़ार किये बैठे थे,
तुम न आये,
प्यार कि मूरत बन इज़हार किये बैठे थे,
तुम न आये,
बेखुदी के आलम में निकलती रही आहें,
तुम न आये,
जिस्म फ़ना हो गया सुलगती रही बाहें,
तुम न आये,
बेजान जिन्दगी में बहार आ गयी होती पर,
तुम न आये,
तन्हाई की वो रातें साथ कट गयी होती पर,
तुम न आये,
ख्वाबों में तेरे आने के अरमान सजाये बैठे थे,
तुम न आये,
फिर भी यादों में तेरी दुनिया लुटाये बैठे थे,
तुम न आये |
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