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Wednesday, May 22, 2013

जश्न और जाम...!!! "रोहिणी संकलन" से...

Today 25th march at 11:29am | Edit Draft | Discard

आज तो जश्न की रात है,
चौपाल पर बिछी बिसात है
क्या पता.....किसका दिन आएगा ?
कौन जाने......कितना ले जाएगा ?

सारे स्तब्ध हैं, खामोश हैं,
लगता है ख़ुशी में मदहोश हैं,
फ़िक्र न करना यारों हिस्से मे आएगा,
इतना बड़ा बकरा है आखिर कहाँ जायेगा ?

वो कहते हैं उन्हें पिलाना नहीं आता,
पर जाम पे जाम पिलाये जाते हैं,
मय का नशा भी कोई नशा है यारों ?
नज़रों से ही काम चलाये जाते हैं |

जाम पीना किसी के लिए ज़रूरी है.
तो पिए बिना किसी की जिंदगी अधूरी है,
क्या करे यारों छोड़ी नहीं जाती,
अब तो बस बन गयी मजबूरी है |

वो खुश हैं की उन्होंने जाम पिलाया है,
आवाजें दे-देकर हमें बुलाया है,
इसे नासमझी कहें.....या कुछ और,
न चाहते हुए भी उन्होंने जी तो जलाया है...!!!


रोहिणी संकलन से एक रचना............ये रचना रोहिणी की निजी संपत्ति है, प्रकाशित करने से पहले कृपया संपर्क कर अनुमति ले|| rohinisnegi@gmail.com/rohininegi@yahoo.com

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