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Wednesday, May 22, 2013

मदहोशी...!!! "रोहिणी संकलन" से...

Friday Feb 5th 2010 at 1:59pm |

आज न जाने वो,
मदहोशी में क्या कह गए ?
हम तक बात भी पहुँच गयी,
और उन्हें पता भी न चला |

शुक्र है उनका,
बेहोशी में ये काम कर गए,
दीवाने तो थे ही कायल भी हो गये,
और उन्हें पता भी न चला |

अपनी ही आँखों से,
वो कत्ल कर गये,
हम फ़ना भी हो गये,
और उन्हे पता भी न चला |

चराग रोशन किया था,
उनके आँगन मे,
बेदर्द दुनिया वाले बुझा गये,
और उन्हे पता भी न चला |

उम्मीद न की थी, कभी भी उनसे,
फ़िर भी अरमान जगा गये,
और उन्हे पता भी न चला |

बे-इन्तेहाँ मुहब्ब्त के सहारे,
जीते रहे हम, दिल छलनी हो गया,
और उन्हे पता भी न चला |

रोहिणी संकलन से एक रचना............ये रचना रोहिणी की निजी संपत्ति है, प्रकाशित करने से पहले कृपया संपर्क कर अनुमति ले|| rohinisnegi@gmail.com/rohininegi@yahoo.com

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