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Wednesday, July 13, 2022

दिन-चर्या...!!! "रोहिणी संकलन" से...

बरखा भी नि झुरौणी, 
येक बूंद पाणिक भी नि औणी, 
गोर-बाछरोंकु लराट छ जोड्यु, 
गुठ्यार मा, 
त्यु द्योर भी नि बर्खीणी | 

हे मेरी ब्वे, निरास हवेगे, 
कुएड़ी-कुएड़ू छ दिखेड़ी, 
पार डाँड तू, 
पण ते द्योरतें, 
कन चुकपट पोड़गे |
 
सुबेर 4 बजी उठी तें, 
धार बिटिन पाणि लैगें, 
गुठ्यार्कु मोल गाड़ ले, 
भैंसी ज्वा रमौणी छ, 
वींमू घास भी धोल ले, 
पण चौसिंग्या लगोठ, 
मजाण कख लूकिगे |      

म्यार दग्ड्या सौब घस्यार, 
कबारि पैट गेन, 
थक गेन बिचार, 
मैं धई लगे तेन | 
दाथुड़ी अर डोरीड़ि, 
कुजाणी कख धोलि मैन,
खोजि-खोजिक पराण मेरु, 
जुकीड़ी तु ऐगे | 

"जीहोर" द्याखल त, 
खैर नि छ मेरी, 
कल्योकि त फंड फुका, 
पाणिन भरलु तब गेरी |
खाणु पकौण त दूरकि बात छ, 
चुल्लू भी नि जगौण देणी, 
हे मेरी माँजी तब मैन,
क्या सुदी ख़ाब खेच्णि...... ? 
 
 
रोहिणी संकलन से एक रचना...............ये रचना रोहिणी की निजी संपत्ति है, प्रकाशित करने से पहले कृपया संपर्क कर अनुमति लें|| rohinisnegi@gmail.com/rohininegi@yahoo.com

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