अब ये दौर
कितना प्रसिद्ध हो चला है,
तस्वीर देख कर तो,
ये सिद्ध हो चला है,
आँखों मे चश्मा,
पंजों पर "की-पैड" है,
"डौगी" को देखो,
करता ये "चैट" है |
मेरा "टायसन",
इतना एडवांस है,
"फ़ेस-बुक" पर,
लेता चान्स है,
"फिमेल फ्रेंड्स" से,
करता "रोमांस" है,
तभी तो इसका,
अपना "ग्लान्स" है |
न जाने आजतक,
कितनों को पटाया है,
"फ्रेंड-रिक्वेस्ट" भेज कर,
कितनों को सताया है,
"कनफर्म" किया तो समझो,
बात बन जाएगी,
गर नहीं किया तो कोई,
दूसरी "लाइन" पर आएगी |
दिन मे उसके पास,
फुर्सत के यही पल खाली हैं,
क्योंकि......रात "घर" की,
करनी भी तो रखवाली है,
अपना काम निभाना,
वो बख़ूबी जानता है,
तभी तो सारा "ब्लौक",
उससे थर-थर काँपता है |
रोहिणी संकलन से एक रचना...............ये रचना रोहिणी की निजी संपत्ति है, प्रकाशित करने से पहले कृपया संपर्क कर अनुमति लें|| rohinisnegi@gmail.com/rohininegi@yahoo.com
No comments:
Post a Comment