मैं एक डाली छौं, (प्रकृति एवं स्त्री से संबोधित )
कोंगिल सी डाली, (कोमल)
हर्युं-भर्यु, फलदार, फूलदार,
एक खुशबूदार डालू,
सबू सन फल दयाण,
मेरु काम छ...........!
फूल पाती कि खुशबू, (सुख)
उन्कि खिलखिलाहट,
अर महक द्यान,
मेरु काम छ...........!
पर क्या कन.........?
मैं बहुत दुखी छौं....!
अ र आहत भी .......!
तुम्हार देयां ऊँ जख्मोंन, (महत्वाकांक्षा)
जू कभी अफ्र पूर्ती कि खातिर,
तुमुन मैंसन देईन...|
जब-जब तुमुन सोची, (विकास, पुरुषत्व)
जब-जब तुम्हारू जू बोली,
जब-जब तुमुन चाही,
मैंसन पीड़ा दिनी अर चैन पायी,
कभी सोची..............!
मैफर क्या बितिदी होली....?
तुमुन इन किले करी......?
मेंन ता तुम सन अपनी छाया दिनी, (सुरक्षा, सेवा)
ठंदु ब्थों दिनी,
जैक निस निश्चिन्त ह्वेतें,
तूमुन चैनकि सांस लीनी,
जैकि अंगवाली मरी तें, (अपनाना)
तुमुन अफ्र सुपन्या सजें...!
पर मेरु सपनोंकु क्या......?
मैंन तुम सन फल दिनी, (भोजन,संतान)
जैसन ग्रहण करी तें तुमुन,
पेट कि अग्नि शांत करी, (वंश वृद्धि )
तुम्हारी अतृप्त आत्मा सन तृप्त करी,
तुम सन आत्म-संतुष्टि प्रदान करी...!
मैंन अफ्रू दायित्वा निभायी,
तुमुन क्या करी..............?
यांक बार मा,
एक पल भी कभी सोची...?
अब मेरी बारी छ..............!
इन बिलकुल नि होलू,
जू तुम सन हर वू सुख चेदू,
जैकू तुम हकदार छौं,
ता मैं भी चयेनी,
हर वू सुख......................!
जैकी मैं हकदार छौं.........!
निथर भूल जयां,
मयारू वू मर्म स्पर्श, (सेवा-भाव)
जू तुम्हार अस्तित्व्कु,
गवे देन्दन......................!
भूल जयांन वी खुशबू सन,
वीं रंगत सन,
जैन तुम्हार जीवन,
सम्पूर्ण बनायी...............!
भूल जयांन वू गुणों सन, (व्यवहार)
जैसन गूंथी तें,
तुमुन माला बनायी........!
(अंतिम पंक्तियों मा प्रकृति और स्त्री द्वि मानव-जाति सन आगाह छन कन्या कि जू अभी भी नि संभलें
ता बाद मा जू भी हश्र होलू (च वू प्रकृति कु प्रकोप हो या स्त्री कु विद्रोह) वांकु जिम्मेदार हम नि छ..)
सेहन-शक्ति कि भी सीमा होंदी,
बिन रोयाँ माँ दूध नि देंदी,
अब भी कुछ नि बिगड़ी तुम्हारू,
प्रलय औंण माँ देर नि लगदी,
यदि हाँ ता हाँ................! (आगाह)
निथर............................!
अब मेरी बारी छ...........!! (प्रकोप या विद्रोह के लिए तैयार)
रोहिणी संकलन से एक रचना...............ये रचना रोहिणी की निजी संपत्ति है, प्रकाशित करने से पहले कृपया संपर्क कर अनुमति लें|| rohinisnegi@gmail.com/rohininegi@yahoo.com
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