ये वक़्त ..
क्यों गुजरता नहीं..
गुजरते वक़्त के साथ,
तन्हाइयां बेवजह..
नज़दीक चली आती हैं ।
कुछ-एक पल..
दिलबर की रहनुमाई में..
तो इत्मीनान दिलाते हैं,
सेहर होते ही नज़रों से..
गायब हो जाते हैं ।
रोने को यूँ तो..
बहुत है आँखें..
सिर्फ आंसू बहाने को,
साथ निभाने के नाम पर..
सब लौट जाते हैं ।
रोहिणी संकलन से एक रचना...............ये रचना रोहिणी की निजी संपत्ति है, प्रकाशित करने से पहले कृपया संपर्क कर अनुमति लें|| rohinisnegi@gmail.com/rohininegi@yahoo.com
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