राष्ट्र-भक्ति का अनोखा चिंतन,
मर्म-स्पर्शी वेदना का मंथन,
हृदय-गति को सम्भालकर थामना,
जीवन में कष्टों का हो जब सामना…!
आरोप-प्रत्यारोपों का प्रकरण,
दिन-रात की कठोर प्रतारणा,
निरंतर शरीर को झकझोरते,
गहरे घावों की वेदना…!
रिक्त-हृदय की पीड़ा अधिक,
और लहु का रिसाव गहरा है,
बिखरे अरमानों के घेरे में,
जगह-जगह विचारों पर पहरा है…!
प्रकाशहीन-पथ-भ्रष्ट जीवन का,
ये प्रकरण अभी अधूरा है,
संवेदनाओं का सिलसिला रिक्त सही,
प्रतीक्षा में प्रभाव-फेरा है…!!
रोहिणी संकलन से एक रचना...............ये रचना रोहिणी की निजी संपत्ति है, प्रकाशित करने से पहले कृपया संपर्क करें || rohinisnegi@gmail.com/rohininegi@yahoo.com
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