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Thursday, July 14, 2022

प्रतार्णा…..!!” रोहिणी संकलन से”…!!


राष्ट्र-भक्ति का अनोखा चिंतन,
मर्म-स्पर्शी वेदना का मंथन,
हृदय-गति को सम्भालकर थामना, 
जीवन में कष्टों का हो जब सामना…!

आरोप-प्रत्यारोपों का प्रकरण,
दिन-रात की कठोर प्रतारणा,
निरंतर शरीर को झकझोरते,
गहरे घावों की वेदना…!

रिक्त-हृदय की पीड़ा अधिक,
और लहु का रिसाव गहरा है,
बिखरे अरमानों के घेरे में, 
जगह-जगह विचारों पर पहरा है…!

प्रकाशहीन-पथ-भ्रष्ट जीवन का,
ये प्रकरण अभी अधूरा है,
संवेदनाओं का सिलसिला रिक्त सही,
प्रतीक्षा में प्रभाव-फेरा है…!!


रोहिणी संकलन से एक रचना...............ये रचना रोहिणी की निजी संपत्ति है, प्रकाशित करने से पहले कृपया संपर्क करें || rohinisnegi@gmail.com/rohininegi@yahoo.com

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