छत की मुंडेर पर आकर,
दूर आसमां पर बादल देखना,
लगता है जिंदगी बन गयी है |
काश ये बादल आते,
तुझ तक मेरा पैग़ाम पहुंचाते,
कहते कितनी खुशनसीब हूँ मैं,
की मुझे तेरा प्यार मिला,
उसी के इंतज़ार में,
अब ये सेहर गुज़र रही है |
ऐसा करके ये न समझना,
तुम्हें भुला रही हूँ,
वो भी मेरा अरमान है,
जिसे बुला रही हूँ |
अब मेरी जिंदगी में,
एक और भी आएगा,
जो हर दम तेरी याद दिलाएगा,
आकर मेरी सुनी दुनिया को,
अपनी किलकारियों से संवारेगा |
तब उस पल शायद मैं,
सब कुछ भुला जाऊं,
पर एक हसरत रहेगी मेरी,
की तुझको भी उस वक़्त पाऊं |
रोहिणी संकलन से एक रचना...............ये रचना रोहिणी की निजी संपत्ति है, प्रकाशित करने से पहले कृपया संपर्क करें || rohinisnegi@gmail.com/rohininegi@yahoo.com
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