Monday, March 8, 2010 at 2:14pm
दिल में रखकर वो हमें परेशां क्यों होते हैं ?
हद ही तै करनी थी तो मुहोब्बत क्यों की ?
हल्की सी ख़लिश से हैरान क्यों होते हैं ?
सहन न करना था तो मुहोब्बत क्यों की ?
बेवफा निकले वो तो बेज़ुबान क्यों होते हैं ?
शर्मिंदा होना था तो मुहोब्बत क्यों की ?
सामने आये तो पशेमां क्यों होते हैं ?
नज़र नहीं मिलानी थी तो मुहोब्बत क्यों की ?
चुपके से निकल कर अनजान क्यों बनते हैं ?
बात न करनी थी तो मुहब्बत क्यों की ?
कतराये फ़िरते हैं हम से वो क्यों अक्सर ?
हिचकिचाना ही था तो मुहब्बत क्यों की ?
धोख़ा दिया था हमे वो जानते हैं,
पछतावा ही करना था मुहब्बत क्यों की ?
प्यार एक दर्द है सोचकर क्यों रोते हैं ?
पी्डा न सहनी थी तो मुहब्बत क्यों की ?
रोहिणी संकलन से एक रचना...........ये रचना रोहिणी की निजी संपत्ति है, प्रकाशित करने से पहले कृपया संपर्क कर अनुमति लें || rohinisnegi@gmail.com/rohininegi@yahoo.com
दिल में रखकर वो हमें परेशां क्यों होते हैं ?
हद ही तै करनी थी तो मुहोब्बत क्यों की ?
हल्की सी ख़लिश से हैरान क्यों होते हैं ?
सहन न करना था तो मुहोब्बत क्यों की ?
बेवफा निकले वो तो बेज़ुबान क्यों होते हैं ?
शर्मिंदा होना था तो मुहोब्बत क्यों की ?
सामने आये तो पशेमां क्यों होते हैं ?
नज़र नहीं मिलानी थी तो मुहोब्बत क्यों की ?
चुपके से निकल कर अनजान क्यों बनते हैं ?
बात न करनी थी तो मुहब्बत क्यों की ?
कतराये फ़िरते हैं हम से वो क्यों अक्सर ?
हिचकिचाना ही था तो मुहब्बत क्यों की ?
धोख़ा दिया था हमे वो जानते हैं,
पछतावा ही करना था मुहब्बत क्यों की ?
प्यार एक दर्द है सोचकर क्यों रोते हैं ?
पी्डा न सहनी थी तो मुहब्बत क्यों की ?
रोहिणी संकलन से एक रचना...........ये रचना रोहिणी की निजी संपत्ति है, प्रकाशित करने से पहले कृपया संपर्क कर अनुमति लें || rohinisnegi@gmail.com/rohininegi@yahoo.com
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