by Rohini Shailendra Negi on Tuesday, September 11, 2012 at 11:24am
श्वेत वर्ण है स्याह केश,
उल्झत सुल्झत न भयो तन से,
न कहे न बने कछु बात,
जतन करूँ,
राम बचाए ई जोबन से.......!
नैन करें बेचैन रात भर,
करवट बदल रहे खटिया पर,
ऊ हमरी कोई बात सुने नहीं,
बईठे हैं बस मूंह फिरा कर....!
कछु कहना कछु सुनना होई तो,
का कहें कईसे कहें हम,
हमरे बस मे अब कछु नाही,
राम ही राखे कहत रहे हम....!
चाहें हमरा ध्यान रखें ऊ,
हमरा थोड़ा मान रखें ऊ,
ई बिपदा को पार लगईके,
कईसन भी उद्धार करें ऊ......!
ऊके नाम की माला अब तो,
बना के घंटी टांग लिए हम,
प्राण-पखेरू जाये न उड़ कहीं,
गर्दन मा लटकाए लिए हम....!
रोहिणी संकलन से एक रचना...............ये रचना रोहिणी की निजी संपत्ति है, प्रकाशित करने से पहले कृपया संपर्क कर अनुमति लें|| rohinisnegi@gmail.com/rohininegi@yahoo.com
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