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Wednesday, September 12, 2012

और तुम मुस्कुराए...!!! "रोहिणी संकलन" से...

Saturday, March 6, 2010 at 5:30PM

कितना रोका था हमने,
बेलगाम आंसुओं को.
फिर भी छलक आये,
और तुम मुस्कुराये |

दिलों के तार चाहे,
कितना कि जुड़ जाएँ,
मगर तोड़ आये,
और तुम मुस्कुराये |

छवि हमारी तेरे दिल में,
सिमट कर रह गयी,
हम उफ़ तक न कर पाए,
और तुम मुस्कुराये |

साँसें थम सी जाती थी,
एक आहट पर तेरी,
बेबसी पे हम कसमसाए,
और तुम मुस्कुराये |

हमारी हंसी छीन कर,
ख़ुशी मिलती है ग़र,
तो लेलें जान हम सो जाएँ,
और वो हमेशा मुस्कुराएँ |


रोहिणी संकलन से एक रचना...........ये रचना रोहिणी की निजी संपत्ति है, प्रकाशित करने से पहले कृपया संपर्क कर अनुमति लें|| rohinisnegi@gmail.com/rohininegi@yahoo.com

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