हाथों की लकीरों में क्या लिखा है.....?
ये कौन जान पाया है अब तक.....?
रेखाएं अक्सर बदलती रहती हैं,
समय की धुंधली परतें हैं जबतक |
दायीं हथेली में छोटा-सा तिल,
न जाने क्या-क्या कहता है मुझसे...?
करती हूँ जब-जब बंद मैं मुट्ठी,
दिखता है कल एक अलग नज़र से |
कहतें हैं लोग है चन्द्र हथेली में,
चन्द्र शीतलता की पहचान है जानती हूँ,
रेखाएं गहरी हैं, साफ़ हैं, सुथरी भी,
मैं न पढ़ पायी फिर भी अनजान हूँ |
वैसे तो रेखाएं सब बोलती हैं,
क्या है छुपा राज़ सब खोलती हैं,
किस्मत में जो भी लिखा है बताये,
सब जानकर भी न इसको बदल पाए |
मुद्दत हुई इनको देखे हुए अब,
हल्की हुई जा रही हैं ये घिस कर,
रोज़ ये कहती हैं मुझसे अकेले में,
बैठ न यूँ हाथ पर हाथ धर कर |
कर्म तो करना है, करना पड़ेगा,
जो कुछ लिखा है वो सहना पड़ेगा,
यही नियति का नियम है,
बदल मत....................
फल क्या मिलेगा वो खुद तय करेगा |
रोहिणी संकलन से एक रचना...............ये रचना रोहिणी की निजी संपत्ति है, प्रकाशित करने से पहले कृपया संपर्क करें || rohinisnegi@gmail.com/rohininegi@yahoo.com
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