फ़िदा हूँ उसकी बेवफाई पर,
बेवफाई से भी वफ़ा छलके,
ग़म-गीन हूँ इस बात पर,
नम हैं मेरी जो सूखी थी पलकें.....?
पथराये होंठ चुप्पी साधे हैं,
उसकी रुसवायी मेरे सर माथे है,
कुछ ज्यादा ही उम्मीदें कर बैठे,
कहने को बस......ये रिश्ते-नाते हैं |
दिल-ए-ख्वाहिश है मेरी,
खुश रहे खुशबु-ए-चमन में,
हम याद आये न आयें उसे,
वो रहेगा हमेशा हमारे ज़हन में |
महक बना कर उसको अपनी,
साँसों में हम बसा लेंगे,
घोल कर पी जायेंगे ग़म,
सदके में "जान" वार देंगे |
रोहिणी संकलन से एक रचना...............ये रचना रोहिणी की निजी संपत्ति है, प्रकाशित करने से पहले कृपया संपर्क करें || rohinisnegi@gmail.com/rohininegi@yahoo.com
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