लोग कहते हैं प्यार ख़ुदा है,
ग़र है तो फिर डर क्यों.............?
लोग कहते हैं प्यार इबादत है,
ग़र है तो फिर दर्द क्यों.............?
लोग कहते हैं प्यार वरदान है,
ग़र है तो फिर अभिमान क्यों....?
लोग कहते हैं प्यार विश्वास है,
ग़र है तो निराशा क्यों..............?
लोग कहते हैं प्यार शरारत है,
ग़र है तो फिर सज़ा क्यों.........?
लोग कहते हैं प्यार महबूब है,
ग़र है तो फिर आंसू क्यों..........?
लोग कहते हैं प्यार अनंत है,
ग़र है तो फिर इंतज़ार क्यों.....?
लोग कहते हैं प्यार जज़्बा है,
ग़र है तो फिर तड़प क्यों.........?
लोग कहते हैं प्यार फ़लसफ़ा है,
ग़र है तो फिर सोचें क्यों...........?
रोहिणी संकलन से एक रचना...............ये रचना रोहिणी की निजी संपत्ति है, प्रकाशित करने से पहले कृपया संपर्क करें || rohinisnegi@gmail.com/rohininegi@yahoo.com
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