चाहत को मेरी नज़र ढूँढती है,
कैसा सफ़र है तेरा पूछती है..?
अब इस दिल को तेरी आरजू है,
जल्द आये वापस यही जुस्तजू है |
रखी है दिल में छुपाकर,
इक तेरी ही तस्वीर,
और यादें हैं तेरी, जो मेरे रु-ब-रु है |
आँखों में कटती हैं रातें ये सारी,
यही बस दुआ है खुदा से हमारी,
रहो खुश जहाँ हो वहीं पर सदा तुम,
कि हमको तो फिक्र है तुम्हारी |
समंदर जो गहरा है गहराईयों में,
यादें डुबोता चला जा रहा है,
रोके कोई कैसे इसको कि ये तो,
न चाहते हुए भी बढ़ा जा रहा है |
हाल कैसा है तुम रहते हो जहाँ,
क्या एक कागज़ का टुकड़ा भी नहीं,
जिसमे कर सको बयां...??
अपनी तो हालत है ऐसी यहाँ,
कि दिन में सुकून का ठिकाना कहाँ...??
बस ये तसल्ली दिए जाते हैं,
कि जाता है लेकर ज़माना कहाँ..?
रोहिणी संकलन से एक रचना...............ये रचना रोहिणी की निजी संपत्ति है, प्रकाशित करने से पहले कृपया संपर्क कर अनुमति लें|| rohinisnegi@gmail.com/rohininegi@yahoo.com
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