तमन्ना यही इक,
अगर मान लो तुम,
कि तुम बिन जहाँ में,
हमें कौन प्यारा...??
आहट भी होतो,
लगे दिल को जैसे,
कहीं से कोई,
हमनशीं आ रहा है |
हसरत में डूबे हैं,
हम तो तुम्हारे,
है कौन दूजा,
हमें जो संभाले...??
जहाँ में तुम्हारे,
सिवा है न कोई,
कि बाहें पसारे,
अपलक देखते हैं |
घड़ियाँ जो गिनते हैं,
गिनते ही रहते हैं,
इतना सुकूं है कि,
आओगे इक दिन |
बस बेसब्र होकर,
जीते हैं हम तो,
कि कुछ पल हैं कटते,
और कुछ काटने हैं |
रोहिणी संकलन से एक रचना...............ये रचना रोहिणी की निजी संपत्ति है, प्रकाशित करने से पहले कृपया संपर्क कर अनुमति लें|| rohinisnegi@gmail.com/rohininegi@yahoo.com
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