Tuesday, March 16, 2010 at 12:42pm
अभी सोच में डूबी थी कि..........क्या लिखना है ?
अचानक पंक्तियाँ होठों पर मानो,
लहर की भांति उभर कर छलक गयीं ||
पता चल ही नहीं सका कि.........क्या लिखना है ?
पर शब्द मेरी बेजान उँगलियों में,
गति बन समाये और अक्षरों को भेद गए ||
सफा कोरा है अभी तक............क्या लिखना है ?
मगर ख्वाहिश हिलोरे ले रही है,
अलफ़ाज़ मिलें तो मैं कुछ बुनना शुरू करूँ ||
सहर हो चली इन्तजार में.........क्या लिखना है ?
लफ्ज़ यूँ ही मिलते रहें तो अच्छा है,
उनके सहारे कागज़ पर लिखते चले गए ||
अभी तक सोच में हूँ कि...........लिखूं ना लिखूं !!
असमंजस का घेरा चारों तरफ है,
पर इस दुविधा में भी पृष्ठ भरते चले गए ||
रोहिणी संकलन से एक रचना...............ये रचना रोहिणी की निजी संपत्ति है, प्रकाशित करने से पहले कृपया संपर्क करें || rohinisnegi@gmail.com/rohininegi@yahoo.com
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