Pages

Wednesday, March 24, 2010

आईने का सच....!!! "रोहिणी संकलन" से.....

Sunday, March 14, 2010 at 6:05pm

आईना तो नाम है उस सच्चाई का,
जो चेहरे कि हक़ीक़त बयां करता है |

अनजान बनकर जिंदगी से इसे,
बदलने की चेष्टा क्यों करता है ??

ग़ुरूर जब भी हद से बढ़ जाता है,
आईना तब-तब आगाह करता है |

कितनी ही कोशिश करें उड़ने की,
औक़ात हमको दिखा ही देता है |

यही सच्चाई है अपने जीवन की,
जब कुछ हासिल नहीं होता है |

सोचकर की सबकुछ ठीक है,
आईना मन को मना ही लेता है |

रोहिणी संकलन से एक रचना...............ये रचना रोहिणी की निजी संपत्ति है, प्रकाशित करने से पहले कृपया संपर्क करें || rohinisnegi@gmail.com/rohininegi@yahoo.com

No comments:

Post a Comment