Sunday, March 14, 2010 at 6:05pm
आईना तो नाम है उस सच्चाई का,
जो चेहरे कि हक़ीक़त बयां करता है |
अनजान बनकर जिंदगी से इसे,
बदलने की चेष्टा क्यों करता है ??
ग़ुरूर जब भी हद से बढ़ जाता है,
आईना तब-तब आगाह करता है |
कितनी ही कोशिश करें उड़ने की,
औक़ात हमको दिखा ही देता है |
यही सच्चाई है अपने जीवन की,
जब कुछ हासिल नहीं होता है |
सोचकर की सबकुछ ठीक है,
आईना मन को मना ही लेता है |
रोहिणी संकलन से एक रचना...............ये रचना रोहिणी की निजी संपत्ति है, प्रकाशित करने से पहले कृपया संपर्क करें || rohinisnegi@gmail.com/rohininegi@yahoo.com
No comments:
Post a Comment