Wednesday, March 10, 2010 at 4:28pm
पता नहीं वो कौन है ? जो इतने बड़े ब्रह्माण्ड को
ऊँगली पर नचाये हुए है पर जितना भी सुना है,
यहीं-कहीं हमारे चरों ओर है कैसा दिखता है ?
क्या करता है ? कुछ पता नहीं सुना है...........
हवा जो सांसों के ज़रिये शरीर की धमनियां दौड़ा
रही है, शायद उसमें विद्यमान है
हाँ..........सही है..........वही तो है जो ये सब कर
रहा है शायद उसी ने माटी के पुतले बनाये ?
सोचा होगा.........उसकी बनाई हुई सृष्टि जीवन्त
हो जाएगी..........!! काश............उसे पता होता
आने वाले समय में उसकी रचना ही सृष्टि का
अंत करेगी तो....................!!
समय का चक्र है.........जहाँ से प्रारंभ किया था,
वापसी भी तो उसी दिशा में अनिवार्य है
अन्यथा..............चक्र पूर्ण कैसे होगा ? निर्माण
के पश्चात् विकास.......विकास के पश्चात् विध्वंस
उसके बाद फिर पुनर्निर्माण यही तो सृष्टि का
नियम है
नियम नहीं टूटना चाहिए जो जन्मा है उसका
अंत निश्चित है इसके लिए उसके मायने कभी
नहीं बदलेंगे तभी तो सृष्टिकर्ता को ये आभास
होगा कि कोई भी वस्तु सर्वदा नहीं है
हुंह......तो क्या हुआ अगर उसने बनाया है....!!
रोहिणी संकलन से एक रचना...............ये रचना रोहिणी की निजी संपत्ति है, प्रकाशित करने से पहले कृपया संपर्क करें rohinisnegi@gmail.com/rohininegi@yahoo.com
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