क्या करते हो तुम....??
कितना पाते हो तुम..??
मैं जानती हूँ,
ये कहकर उसने दिल को,
धक्का लगाया था ||
प्यार था आँखों में,
उसके लिए जो,
बरसा वहीँ पर,
ख़तम हो गया था ||
मुझे पता है तुझको,
बहुत दर्द हुआ होगा तब,
पर ये कभी न भूलना,
उसी से कुछ बन गए हो अब ||
जानकर तब उसने,
इनकार किया होगा,
अपने सीने पर शायद,
पत्थर रखा होगा ||
तुम सोचते हो ये,
उसकी नादानी है,
पर तुम्हे ऊपर उठाने में,
उसकी ही मेहरबानी है,
न जाने कब-कहाँ से,
हमें प्रेरणा मिल जाए,
और हम जिंदगी में,
आगे निकल जाएँ ||
तू शुक्र-गुज़ार है उसका,
कभी गुमान न करना,
जिंदगी में कई मोड़ आते हैं,
तू बस उस मोड़ से डरना ||
रोहिणी संकलन से एक रचना............ये रचना रोहिणी की निजी संपत्ति है, प्रकाशित करने से पहले कृपया संपर्क कर अनुमति ले|| rohinisnegi@gmail.com/rohininegi@yahoo.com
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