फूलों की बात क्या कहिये,
वो तो रोतों को हंसते हैं,
एक हमारे बिसाल-ए यार हैं,
जो हमें रुलाते हैं |
कहते थे न जायेंगे,
जाते हैं मगर,
छोड़ेंगे न साथ,
ये जताते हैं मगर |
वापसी का देके दिलासा,
हमें बहलाते हैं,
एक हमारे बिसाल-ए यार हैं,
जो हमें रुलाते हैं |
अरमानों की कश्ती,
अक्सर हिलोरे खाती है,
वजह न सही....
बेवजह ही लहराती है |
लहरों के थपेड़ों में वो,
हमें छोड़ जाते हैं,
एक हमारे बिसाले यार हैं,
जो हमें रुलाते है |
है गुरुर ज़ालिम पर,
अपने से भी ज्यादा,
जान देकर भी वो,
निभाएंगे वादा,
बस इस आस में,
रस्मे निभाए जाते हैं,
एक हमारे बिसाले यार हैं,
जो हमें रुलाते है |
दूर जाकर वो हमको,
याद करते हैं या नहीं ?
अपने ही काम में,
मसरूफ रहतें हैं वहीँ |
हम उनकी याद में यहाँ,
आंसू बहाए जाते हैं,
एक हमारे बिसाले यार हैं,
जो हमे रुलाते है |
बेपरवाह है दिल उनका,
ये सदायें आती हैं,
कानों के पर्दों को,
भेद कर निकल जाती हैं,
हम उनकी लापरवाही को,
नज़र अंदाज़ किये जाते हैं,
एक हमारे बिसाले यार हैं,
जो हमे रुलाते है |
रोहिणी संकलन से एक रचना...............ये रचना रोहिणी की निजी संपत्ति है, प्रकाशित करने से पहले कृपया संपर्क कर अनुमति लें || rohinisnegi@gmail.com/rohininegi@yahoo.com
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