"राष्ट्रवाद"
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अग्नि-परीक्षा होगी अब,
जन-जन के राष्ट्रवाद की,
चौकिदार चोर है क्या...?
गुंजाइश नहीं विवाद की...।
जो जल्लाद, नीच, बिच्छू,
कायर या सर्प बताते हैं,
तंज सभी, स्वयं पर उलटे पड़े,
यही दर्शाते हैं...।
जनादेश भारी है उनपर,
मूल्याँकन जिनका संकुचित था,
प्रतिस्पर्धा, निज-आलोचन,
दुष्प्रचार उनका अनुचित था...।
किसने कहा, कार्य कोई भी,
करना अब नामुमकिन है,
सबने देख और जान लिया है,
मोदी है तो मुमकिन है...।
चारों तरफ़ देश में अब तो,
बिजली बनकर 'कौंधी' है,
दशकों तक जो राज किए,
वो पार्टी गिरी 'मुँह-औंधी' है...।
रोहिणी संकलन से एक रचना...............ये रचना रोहिणी की निजी संपत्ति है ।प्रकाशित करने से पहले कृपया संपर्क कर अनुमति लें|| rohinisnegi@gmail.com/rohininegi@yahoo
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