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Wednesday, July 13, 2022

चन्द्रयान-२...!!!


न इतरा इतना कि तुझे, 
छू नहीं सकता कोई, 
छू तो लिया है, 
बस......! 
महसूस करना बाक़ी है ।

हर उस शख़्स की तू,
मेहनत का वो सिला है,
जो दिख तो गया है,
बस......!
तेरा मिलना बाक़ी है ।

आतुर है मन सब का,
न पहुँचा जहाँ कोई,
पहुँचे हैं हम,
बस......!
शोध करना बाक़ी है ।

रोहिणी संकलन से एक रचना...............ये रचना रोहिणी की निजी संपत्ति है ।प्रकाशित करने से पहले कृपया संपर्क कर अनुमति लें|| rohinisnegi@gmail.com/rohininegi@yahoo







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