न इतरा इतना कि तुझे,
छू नहीं सकता कोई,
छू तो लिया है,
बस......!
महसूस करना बाक़ी है ।
हर उस शख़्स की तू,
मेहनत का वो सिला है,
जो दिख तो गया है,
बस......!
तेरा मिलना बाक़ी है ।
आतुर है मन सब का,
न पहुँचा जहाँ कोई,
पहुँचे हैं हम,
बस......!
शोध करना बाक़ी है ।
रोहिणी संकलन से एक रचना...............ये रचना रोहिणी की निजी संपत्ति है ।प्रकाशित करने से पहले कृपया संपर्क कर अनुमति लें|| rohinisnegi@gmail.com/rohininegi@yahoo
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