माँ ऐसा तु खिलौना ला दे,
सुख की नींद मैं सो पाऊँ,
आने वाला कल कैसा है...?
क्यों सोचूँ और घबराऊँ |
जीवन क्या है, क्या नहीं,
इस दौड़-भाग से परे रहूँ,
अपने नरम-नरम तकिये संग,
मीठी-मीठी बात करूँ |
जब सब कुछ मिथ्या है....फिर क्यों,
व्यर्थ मे चिंता वहन करूँ,
कल जो आए कल देखूँगा,
उसमें आज क्यों नष्ट करूँ |
रोहिणी संकलन से एक रचना...............ये रचना रोहिणी की निजी संपत्ति है, प्रकाशित करने से पहले कृपया संपर्क कर अनुमति लें|| rohinisnegi@gmail.com/rohininegi@yahoo.com
सुख की नींद मैं सो पाऊँ,
आने वाला कल कैसा है...?
क्यों सोचूँ और घबराऊँ |
जीवन क्या है, क्या नहीं,
इस दौड़-भाग से परे रहूँ,
अपने नरम-नरम तकिये संग,
मीठी-मीठी बात करूँ |
जब सब कुछ मिथ्या है....फिर क्यों,
व्यर्थ मे चिंता वहन करूँ,
कल जो आए कल देखूँगा,
उसमें आज क्यों नष्ट करूँ |
रोहिणी संकलन से एक रचना...............ये रचना रोहिणी की निजी संपत्ति है, प्रकाशित करने से पहले कृपया संपर्क कर अनुमति लें|| rohinisnegi@gmail.com/rohininegi@yahoo.com
No comments:
Post a Comment