किसी ने कहा मुझसे...........!
दिल तो समंदर है आपका.....!
कभी मीठा तो कभी नमकीन..!
लगता है ख्वाब सा.....!
मीठा तब होता है जब,
अपने-पन का अहसास कराता है,
नमकीन तब........जब,
खट्टे अनुभवों की याद दिलाता है |
दोनों के बिना ये जिंदगी,
कितनी अधूरी है..........?
इसे पूर्ण करने के लिए,
संतुलन बहुत ज़रूरी है |
कम- ज्यादा हो तो समझो,
मामला...........संगीन है,
सुंदर मिश्रण बन जाए गर तो,
जिंदगी फिर रंगीन है |
दोनों की ही एहमियत,
अपनी-अपनी जगह है,
'स्वाद' कहते हैं जिसे,
बस यही तो वजह है |
मीठा नमकीन तो सिर्फ नाम के लिए है,
पर इन दोनों ने काम बड़े किये हैं,
जल्द-बाज़ी में न खोना आवेश,
क्योंकि.......................!!
उचित मात्रा का ये समावेश,
बनाता है खुशनुमा परिवेश |
रोहिणी संकलन से एक रचना...............ये रचना रोहिणी की निजी संपत्ति है, प्रकाशित करने से पहले कृपया संपर्क कर अनुमति लें|| rohinisnegi@gmail.com/rohininegi@yahoo.com
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